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आजकल हवा चलती है, बहती नहीं..

आजकल हवा चलती है, बहती नहीं,

इसीलिए शायद नीम का पेड़ पत्तियाँ गिराता है न चाहते हुए भी…

छोटी थी जब मैं तो पेड़ से झरती थीं पत्तियाँ खुद अपनी खुशी से,

हरी-पीली और थोड़ी सूखी पत्तियों के ढेर पर कूदने का संगीत दिखाता था उनकी खुशी…

आज भी ढेर लगा है बाहर, मुर्झायी भूरी-काली पत्तियों का,

बोरे में भरकर ले जा रहा है सफाईवाला, फुरसत ही नहीं है बच्चों को कूदने की।

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प्रकृति प्रकृति नहीं है…..

अद्भुत, अप्रतिम, अद्वितीय यह प्रकृति मात्र वृक्षों एवं जीवों का समुच्चयन नहीं है….. 

यह सार है उन वृक्षों से टपकती वर्षा की बूँदों का जिनमें संगीत है किसी भी वादनयंत्र की ध्वनियों को पीछे छोड़ देने का…

यह दृश्य है उन अकल्पनीय सत्यों का जो जीवन से विरक्ति उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं….

ये केवल कलकल करती नदियों का संगीत नहीं है, ये अनुभव है उसी नदी में बैठे बगुले की चातुर्यता का…..

मात्र कोयल मन को प्रसन्न नहीं कर सकती यदि कौए का कर्कश स्वर उसकी मधुरता का महत्व न बढा़ए….

मात्र सवेरे की लालिमा संतुष्टि नहीं देती यदि पूर्वकालीन रात्रि गहरी न हो……

वृक्षों की हरियाली हरी है तो केवल विस्तृत रेगिस्तान से….

वर्षा का महत्व है केवल सूखे से दरक चुकी शुष्क चटकी भूमि में….

प्रकृति तब तक प्रकृति नहीं है जब तक कि मानव का अस्तित्व अक्षम है उसकी आंतरिक गहराइयों को छू पाने में…..

और मानव तभी तक मानव है जब तक कि अन्य प्रजातियाँ रोक रहीं हैं स्वयं को आगे बढ़ने से……

वाराणसी के बारे में राय बनाने से पहले

ये पवित्र भूमि है भारत की, ये वह वाराणसी है जहाँ अब भी विश्वास व्याप्त है निश्छल भावों में। वह वाराणसी जहाँ वक्त मानो थम सा गया है धर्म और आध्यात्म के साथ।

परंतु मात्र धर्म को वाराणसी की पहचान मानना कुछ ऐसा ही है जैसे कोयल की पहचान मात्र काले रंग को मानना। धर्म तो वाराणसी का अभिन्न अंग है ही, परंतु साथ ही साथ यहाँ जीवन के अनेक रूप बसते हैं। कभी सुबह-सुबह टहलकर देखिए इस नगरी में, इतिहास की किसी भी पुस्तक के वर्णन को पीछे छोड़ दे ऐसा अभूतपूर्व कालविजयी अनुभव प्रदान करने का सामर्थ्य रखने वाला यह नगर न तो विकास की अंधी दौड़ में पागल है और न ही पुरातन रूढ़ियों में जकड़ा है। किसी भी परिस्थिति में मन को शांति देने वाला वाराणसी मात्र आरतियों को गुंजायमान नहीं करता, यह गुंजयित करता है उन लोगों के आंतरिक स्वर जो अन्यथा बाहर नहीं आ पाते।

तो वाराणसी के बारे में कोई राय बनाने से पहले एक बार भ्रमण अवश्य करिए इस नगरी का। हो सकता है सुबह फूल खरीदते समय, या चाय की सुड़कियाँ लेते समय, या यूँ ही अनायास गंगा को निहारते समय स्वयं से सामना हो जाए आपका। उसी स्वयं से जो अभी अंतर्मन में होते हुए भी कोसों दूर है मन मस्तिष्क से।

वो सूनी सी आँखें

वो सूनी सी आँखें …..खोज रही थीं ….उस प्यार को कहीं ,

जो कभी बचपन में ….दिया था उन्होंने …..अपने जिगर के टुकड़े को ।

वो सूनी सी आँखें …..खोज रही थीं …..उन शब्दों को कहीं ,
जो सिखाए थे बचपन में ….उन्होंने अपने होठों से कभी ।

सामने खड़ा उनका …..वो “बेटा” ही था ,
जो आज उन्हें ….इस “Old Age Home” में छोड़ने आया था ।

सामने खड़ा उनका ……वो “बेटा” ही था ,
जो उनके कदमों को भी अब …..अपने दिल से मिटाने आया था ।

वो सूनी सी आँखें ……उसकी इस गुस्ताखी पर भी …..नाराज़ ना थी ,
वो सूनी सी आँखें ……उसकी ऐसी मोहब्बत पर भी ……हैरान न थी ।

रहेंगे वह माँ-बाप उसके सदा …..चाहे “वो” उन्हें ….इस तरह से प्यार करे ,
तकेंगी ये आँखें उसको सदा …..चाहे “वो” इस जनम में …..कितना भी अपराध करे ।

वो सूनी सी आँखें ……उसकी सिर्फ सलामती की ….दुआ करने आई थीं ,
वो सूनी सी आँखें ……उसकी हर ख़ुशी में …..अपनी ख़ुशी ढूँढने आई थीं ।

वो सूनी सी आँखें ……उसकी मजबूरी की ……कहानी सुनने आई थीं ,
वो सूनी सी आँखें ……उसकी कही कहानी में अपना ….नाम~ओ~निशान मिटाने आई थीं ।

कितना वीभत्स था वो नज़ारा ……जब इतनी आह में उन्होंने ….अपना नया आशियाँ सँवारा ,
वो सूनी सी आँखें …..फिर भी उस आशियाने के …..दीप जलाने आई थीं ।

वो सूनी सी आँखें …..अपने बेटे के चेहरे पर …..एक मुस्कान देने आई थीं ,
वो सूनी सी आँखें …..अपने अंत होते जीवन काल का …..एक इतिहास रचने आई थीं ।

कभी “उसे” लाने को …..अस्पताल का बिल ….उन सूनी सी आँखों ने भरा था ,
आज ऐसे ही एक बिल की Copy …..वो सूनी सी आँखें …..अपने Purse में सँजोने आई थीं ।

वो सूनी सी आँखें …..जाते-जाते भी …..”उसे” एक आशीर्वाद  देने आई थीं,
वो सूनी सी आँखें …..इस शहरी ज़िदगी की ……एक अजब तस्वीर दिखाने आई थीं ॥

  There is a message for all- please don’t leave your old parents to old care homes. They have given their entire life to make you what you are today, so have some integrity and humanity and love them when they need you the most.