आजकल हवा चलती है, बहती नहीं..

आजकल हवा चलती है, बहती नहीं,

इसीलिए शायद नीम का पेड़ पत्तियाँ गिराता है न चाहते हुए भी…

छोटी थी जब मैं तो पेड़ से झरती थीं पत्तियाँ खुद अपनी खुशी से,

हरी-पीली और थोड़ी सूखी पत्तियों के ढेर पर कूदने का संगीत दिखाता था उनकी खुशी…

आज भी ढेर लगा है बाहर, मुर्झायी भूरी-काली पत्तियों का,

बोरे में भरकर ले जा रहा है सफाईवाला, फुरसत ही नहीं है बच्चों को कूदने की।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s