वाराणसी के बारे में राय बनाने से पहले

ये पवित्र भूमि है भारत की, ये वह वाराणसी है जहाँ अब भी विश्वास व्याप्त है निश्छल भावों में। वह वाराणसी जहाँ वक्त मानो थम सा गया है धर्म और आध्यात्म के साथ।

परंतु मात्र धर्म को वाराणसी की पहचान मानना कुछ ऐसा ही है जैसे कोयल की पहचान मात्र काले रंग को मानना। धर्म तो वाराणसी का अभिन्न अंग है ही, परंतु साथ ही साथ यहाँ जीवन के अनेक रूप बसते हैं। कभी सुबह-सुबह टहलकर देखिए इस नगरी में, इतिहास की किसी भी पुस्तक के वर्णन को पीछे छोड़ दे ऐसा अभूतपूर्व कालविजयी अनुभव प्रदान करने का सामर्थ्य रखने वाला यह नगर न तो विकास की अंधी दौड़ में पागल है और न ही पुरातन रूढ़ियों में जकड़ा है। किसी भी परिस्थिति में मन को शांति देने वाला वाराणसी मात्र आरतियों को गुंजायमान नहीं करता, यह गुंजयित करता है उन लोगों के आंतरिक स्वर जो अन्यथा बाहर नहीं आ पाते।

तो वाराणसी के बारे में कोई राय बनाने से पहले एक बार भ्रमण अवश्य करिए इस नगरी का। हो सकता है सुबह फूल खरीदते समय, या चाय की सुड़कियाँ लेते समय, या यूँ ही अनायास गंगा को निहारते समय स्वयं से सामना हो जाए आपका। उसी स्वयं से जो अभी अंतर्मन में होते हुए भी कोसों दूर है मन मस्तिष्क से।

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2 thoughts on “वाराणसी के बारे में राय बनाने से पहले

  1. Very true thoughts related to Varanasi as I’ve been already gone through these spiritual feelings last year when I visited this holy place , which u hv already mentioned here. So thanks for making me feel again.’हर हर महादेव’

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